Sunday, 8 May 2011

दाम्पत्य -कुछ दोहे

  दाम्पत्य -कुछ दोहे

 हो सितार विश्वास का, नेहों का मिजराव।
 बजता है तब ताल में, दांपत्य का राग॥
        तिनके चुनकर नेह के, विश्वासों की डोर।
        यूँ जीवन चादर बुनो, फटे ओर ना छोर॥
 दो बरतन होते जहाँ, होता है टकराव।
 गाँठ नहीं बाँधें कभी, यदि जो हुआ दुराव॥
        मैं न हुई रत्नावली, ना तुम तुलसीदास।
        कभी बनूँगी प्रेरणा, मुझको है विश्वास॥
 ना तुम हो अब जानकी, ना मैं हूँ श्रीराम।
 मायावी  मारीच  पर, दोनों  कसें लगाम॥
         बार-बार कहकर गई, सबका  रखूँ  खयाल।
         तन से थी वह मायके, मन से थी ससुराल॥
 बिस्तर, बैठक या किचन, सब में तुम मौजूद।
 हर  कोने में  गंध-सी, रखती  सदा  वजूद॥
          साड़ी पहने जब दिखी, बिटिया पहली बार।
          लगा तुम्हारी रूह ने, लिया पुनः अवतार॥
 करे काम वह सात दिन, क्या मंगल क्या पीर।
 कोई दिन अवकाश का, पा न सकी तकदीर॥
           सोया चादर तानकर, मैं तो हर रविवार।
           उस दिन भी हर चीज थी, टाइम पर तैयार॥
          (* मिजराव - सितार बजाने का छल्ला।)

Friday, 6 May 2011

गाँधी-कल और आज

  गाँधी-कल और आज
     अक्टूबर  की  दूसरी, माह  जनवरी  तीस |
     दो दिन गाँधी देवता, बाकी दिन 'शो पीस'||
               गाँधी दौलत देश की, इक नंबर 'फ्री टोल '|
               इस दौलत पे ना चलें , तोल मोल के बोल ||
    गाँधी इक ऎसी हिना , जिसे लगाना  हाथ |
    यानी  पाना  मुफ्त ही , रंगों  की  सौगात ||
                कुछ ने गाँधी नाम को , बना रखा है ढाल |
                सत्य जिन्हें त्यागे गुए,गुजर चुके कुछ साल ||
   व्यक्ति  नहीं गाँधी महज , है वह एक विचार |
   चाहे  हो  आलोचना ,  होगा   बस   विस्तार ||
                  नहीं बनी ऐसी तुला, जो सकती हो तोल |
                  सत्य, अहिंसा, खादियाँ, तीनों हैं अनमोल ||  
   एक बार यदि पोंछ लो,  दीन  नेत्र  का नीर |
   पाओगे  गाँधी  वहीं ,  बसता  वहीं  कबीर  ||
                   समझ रहे कुछ आज भी, उन्हें टका कलदार |
                   जिसे  चला  कर  वोट  का,  करते  कारोबार ||

  लाठी को अपना लिया , विसरा दिए विचार |
    गाँधी के घर कर रही, हिंसा फिर अधिकार ||
                        - ओम वर्मा   100, रामनगर एक्सटेंशन
                                                                                                                   
देवास